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Trip To Spiti Valley - Narkanda To Jaipur | स्पिति वैली यात्रा - नारकंडा से जयपुर

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स्पिति वैली यात्रा - 07 जून 2019 - नारकंडा से जयपुर

spiti valley trip


कल हम इतने थके हुए थे की सुबह कब हो गयी पता ही नहीं चला l सोने का और मन कर रहा था लेकिन हमे जल्द से जल्द जयपुर की तरफ निकलना था l उठ कर चाय पी, तैयार हुए और सुबह साढ़े छ बजे के आस-पास हम शिमला की ओर रवाना हो गए l सबसे पहला काम तो ये था की शिमला पहुँच कर सबसे पहले विक्रांत की बाइक को सही करवाना था और हमे उम्मीद थी की शायद शिमला में तो बाइक सही हो ही जाएगी l अगर दुर्भाग्यवश शिमला में भी बाइक सही नहीं हो पायी तो फिर अगला विकल्प चंडीगढ़ का ही था l  

मौसम बिलकुल साफ़ था, सुबह की गुनगुनी धुप आ चुकी थी और नारकंडा से शिमला की ओर जाने मे बहुत आनंद आ रहा था l पहाड़ों के किनारे सड़क सकड़ी पर शानदार थी, चारों ओर हरियाली से आच्छादित पेड़ थे और बहुत हल्की सी ठण्ड थी l दुसरे शब्दों में, बाइकिंग के लिए बिलकुल आदर्श और अनुकूल मौसम था बस एक चीज़ जो हमें परेशान किये हुए थी वो थी विक्रांत की बाइक l हालाँकि नारकंडा से शिमला की तरफ ज्यादा चढ़ाई नहीं थी इसीलिए हमे ज्यादा परेशानी नहीं हो रही थी l

उधर रजत, राजेश और अश्वनी सुबह सुबह उठ कर एक बार फिर चिटकुल मे नदी किनारे पहुँच चुके थे l वहाँ ठण्ड बहुत ज्यादा महसूस हो रही थी लेकिन चारों ओर के प्रकृति के खुबसूरत नजारों के आगे ये नगण्य समस्या थी l काज़ा की अपेक्षा चिटकुल काफी नीचे बसा हुआ है इसीलिए अश्विनी की AMS की समस्या बिलकुल सही हो चुकी थी परन्तु अब उसको दूसरी समस्या हो गयी थी और वो थी उसके दांत को लेकर l उसने RCT (Root Canal Treatment) करवाया हुआ था और चिटकुल मे जबरदस्त ठण्ड के चलते उसके दांत में तेज़ दर्द हो रहा था l आदमी का मन कहीं नहीं लगता अगर उसके सर या दांत में दर्द हो | उसके पास कोई दवाई भी नहीं थी और चिटकुल में भी उसे दवाई नहीं मिल पायी l उनको आज चिटकुल से नारकंडा पहुँचना था l ड्राईवर सोनू ने उन्हें आश्वस्त किया कि रास्ते मे कहीं ना कहीं दवाई मिल ही जाएगी l सुबह लगभग आठ बजे के आस पास सब नारकंडा के लिए रवाना हो गए l

इधर हम रास्तों का आनंद लेते लेते लगभग साढ़े नौ बजे शिमला स्तिथ बजाज के सर्विस सेंटर पहुँच गए l हमारी किस्मत ने साथ दिया और आखिरकार विक्रांत की बाइक का ख़राब पार्ट यहाँ मिल ही गया लेकिन इसको बदलने मे ही लगभग दो घंटे लग गए l विक्रांत ने बाइक ठीक होने के बाद बहुत राहत महसूस की क्योंकि वो यहाँ तक उसकी बाइक बहुत मुश्किलों से लेकर आया था l हमने सुबह से कुछ भी खाया नहीं था इसीलिए सोचा की यहीं शिमला में कुछ खा लिया जाए लेकिन उस दिन शिमला में बहुत ज्यादा भीड़ थी और हम जल्द से जल्द शिमला से बाहर निकलना चाह रहे थे इसीलिए हमने सोचा की शिमला से निकलकर ही कुछ खा लेंगे l 

जल्द ही हम शिमला से बाहर निकल गए और लगभग बारह बजे एक पंजाबी ढाबे पर रुक गए l शिमला से नीचे आते ही अचानक ही गर्मी का एहसास होने लग गया और हमने ढाबे पर खाने के साथ एक-एक बड़ा गिलास लस्सी का भी पिया l लस्सी पी तो ली लेकिन फिर बाइक पर चलते चलते बहुत सुस्ती सी आने लगी लेकिन हम कहीं नहीं रुके बस चलते रहे l सोलन निकला, चंडीगढ़ निकला और फिर हमने अंबाला भी पार कर लिया l अब तो हमे काफी जबरदस्त गर्मी का एहसास होने लगा था और मन में विचार आ रहा था की बस एक दिन पहले हमने -3 डिग्री पर रात बितायी थी और आज यहाँ पारा लगभग 42 डिग्री के आस पास था l हम काफी देर से हम बाइक चला रहे थे, लगभग शाम के चार बज रहे थे और अब हमे चाय की तीव्र इच्छा हो रही थी सो अम्लाबा से निकलते ही एक अच्छे से ढाबे पर हम रुके, चाय पी और आधा घंटा विश्राम किया l 

चाय पी कर हम एक बार फिर हाईवे पर थे l हमे बिलकुल भी नहीं पता था की हमे आज कहाँ तक जाना है पर हमने सोचा क्यों ना आज हम अपने शरीर की सीमा जांचे l हमारे सामने हाईवे था और इस पर यातायात बह रहा था, सड़क बेहतरीन थी तो दिमाग में आया की क्यों ना आज ही सीधा जयपुर चला जाए l विक्रांत और मैंने कभी भी इतनी ज्यादा बाइकिंग नहीं की थी लेकिन आज हमारे सामने एक मौका था, सब कुछ सोच कर जयपुर को लक्ष्य बनाकर हम निकल पड़े l

NH-44 पर चलते चलते हमने कुरुक्षेत्र पार किया, करनाल पार किया और फिर पानीपत से NH-709, जो की गोहाना की तरफ जाता है, पर आ गए l जयपुर से चंडीगढ़ आते वक़्त हमने पेरिफीरल हाईवे लिया था लेकिन चूँकि आज हमे रात में भी सफ़र करना था इसीलिए हमने ये मार्ग चुना l पेरिफेरल हाईवे पर अगर आपके साथ कुछ दुर्भाग्यपूर्ण घटना हो जाए तो वहाँ मदद मिलना काफी चुनौतीपूर्ण सिद्ध होता, उसकी तुलना मे जो हाईवे हमने लिया वो काफी बहता हुआ था l 

उधर रजत, राजेश और अश्विनी शाम 6 बजे के आस पास नारकंडा स्तिथ हाटू होमस्टे पहुँच गए l अश्विनी ने अपने एक डेंटिस्ट मित्र से फ़ोन पर ही बात की और उसके मित्र ने कुछ दवाईयां लेने का सुझाव दिया l अश्विनी ने दवाइयाँ ली लेकिन उस दवा से उसे कुछ ख़ास फायदा नहीं हुआ l हाटू होमस्टे में उनका कमरा वही था जो जाते वक़्त था और वहाँ से दिखने वाले दृश्य लाजवाब थे l नारकंडा में तीनों मित्र घुमे-फिरे और उन्होंने एक साथ अच्छा समय व्यतीत किया l

गोहाना के आस पास हमने एक बार फिर चाय नाश्ता किया और आधा घंटा विश्राम के बाद फिर निकल पड़े l रात आठ बजे के आस पास हम झज्झर से आगे निकल गए l अब हमे थकान महसूस होने लगी थी लेकिन लक्ष्य के रूप में हमे बस जयपुर ही दिख रहा था l हमने निश्चय किया की रात का खाना हम NH-8 पर पहुँच कर ही खाएँगे l अँधेरा होने के कारण हमारी रफ़्तार थोड़ी धीमी हो गयी लेकिन हम अब जल्द से जल्द NH-8 पहुँचना चाहते थे l आखिरकार रात दस बजे के आसपास हम NH-8 पहुँच गए और NH-8 पर पहुँचते ही हमे बहुत ख़ुशी हुई और हमारे अन्दर जोश भर गया l

लगभग साढ़े दस बजे NH-8 पर नीमराना से आगे निकलकर हम एक ढाबे पर रुके क्योंकि अब हमे भूख लगने लगी थी और अब इच्छा भी हो रही थी के थोड़ी देर कहीं आराम कर ले l ढाबा बहुत अच्छा था, AC चल रहा था, खाना बहुत शानदार था और खाना खा कर हम कुछ देर वहीँ सुस्ताते रहे l अब तो बिलकुल भी आगे जाने की इच्छा नहीं हो रही थी और मन कर रहा था की यहीं सो जाए लेकिन हम मन में ये निश्चय कर चुके थे की जयपुर आज ही पहुँचना है l 

अब तो बाइक पर नींद का एहसास हो रहा था जो की वास्तव मे बहुत खतरनाक था l बाइक चलाते चलाते अगर कहीं झपकी लग गयी तो NH-8 दूसरा मौका नहीं देगा l आखिरकार हमे एक घंटे बाद ही दुबारा रुकना पड़ा क्योंकि नींद का प्रभाव बढ़ता ही जा रहा था l एक ढाबे पर रुके, ठन्डे पानी से मुँह धोया और कड़क चाय पी फिर दुबारा रवाना हुए l इस युक्ति से हमे फायदा तो हुआ लेकिन कुछ ही देर बाद वही सब होने लगा l एक घंटे चलने के बाद एक बार फिर हमने इसी युक्ति का दुबारा सहारा लिया और इसी तरह मुँह धोते हुए और चाय पीते हुए हम आगे बढ़ते रहे l 

जयपुर की दुरी लगातार कम होती गयी और आखिरकार रात एक बजे के आस पास जयपुर की बाहरी पुलिस चेकपोस्ट पर पहुँच गए l पुलिस वाले ने रोका और पूछा इतनी रात को कहाँ से आ रहे है, जब हमने उन्हें बताया की हम नारकंडा, हिमाचल प्रदेश से आ रहे है तो उन्हें बड़ा आश्चर्य हुआ l उन्होंने कुछ देर हमसे हमारी यात्रा के बारे में बात की, हमारे लाइसेंस देखे और फिर हमे जाने दिया l विक्रांत और मैं रात पौने दो बजे मोती डूंगरी स्तिथ गणेश मंदिर पहुँच गए जहाँ से हमने ये यात्रा चालू की थी l भगवान् को धन्यवाद देकर और एक दुसरे से विदा लेकर हम दोनों अपने अपने घरों की ओर रवाना हो गए l

आज हमने लगभग 700 किलोमीटर से अधिक बाइक चलायी थी, लगभग 17 घंटे l हमने हमारी शरीर की सीमा को जांच लिया था और हमे इस बात पर बहुत फक्र महसूस हो रहा था की हम एक बार मे नारकंडा से जयपुर आ गए थे या इसे यूँ भी कह सकते है की हम काज़ा से जयपुर दो दिनों मे पहुँच गए थे l इस यात्रा ने हमारे शरीर की क्षमताओं को बढ़ा दिया था और हमारी भविष्य मे होने वाली और भी बेहद दुर्गम यात्राओं के द्वार खोल दिए थे l 

हम जयपुर पहुँच चुके थे और उधर रजत, राजेश और अश्विनी सुबह नारकंडा से चंडीगढ़ के लिए रवाना हुए जहाँ से उनकी जयपुर के लिए ट्रेन थी l अश्विनी के दांतों का दर्द सही नहीं था इसीलिए वे लोग रास्ते मे शिमला के एक अस्पताल में रुके और वहाँ से अश्विनी का सही उपचार हुआ l शाम को ड्राईवर सोनू ने उन्हें चंडीगढ़ के रेलवे स्टेशन छोड़ दिया जहाँ से उन्होंने जयपुर के लिए ट्रेन पकड़ ली l 

ये यात्रा हम सबके लिए बहुत अद्भुत थी और हम सबने इस यात्रा पर बहुत आनंद उठाया l प्राकृतिक सुन्दरता से ओत-प्रोत रास्ते, बर्फ से ढके पहाड़, पहाड़ों पर चढ़ती सर्पिलाकार सकड़ी सड़के , नदी की कलकल और उनका मिलन, बेहद ठंडा मौसम और अभूतपूर्व रोमांच से मिलकर बनी ये यात्रा हमे हमेशा याद रहेगी l हम आशा करते है की हमे ऐसी शानदार यात्राओं पर जाने का  सदैव मौका मिलता रहे l


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नारकंडा से शिमला की ओर

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शिमला की ओर

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हरियाले रास्ते

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अद्भुत

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खुबसूरत रास्ते

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शिमला की ओर

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शिमला की ओर

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शिमला बस पहुँच ही गए

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शिमला

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शिमला का बजाज सर्विस सेंटर

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विक्रांत की बाइक

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शिमला

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ढाबे पर हमारी बाइक्स

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चंडीगढ़ की ओर

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अंबाला के नजदीक

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शाम की चाय @ अंबाला

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NH44

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NH8 की ओर 

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NH8 


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मोती डूंगरी गणेश जी मंदिर, जयपुर

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