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Trip To Spiti Valley | स्पिति वैली यात्रा - प्रस्तावना

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Spiti Valley Trip, Bike Trip To Spiti Valley


ऊँचे ऊँचे पहाड़ों पर चाँदी सी चमकती बर्फ, साफ़ नीला आकाश, बहती नदी और जबरदस्त हरियाली, एक बार आदमी ये सब देख लेता है तो उसका मन बार बार वहाँ जाने को होता है और वैसे भी  घुमक्कड़ी एक ऐसा शौक है जिससे व्यक्ति के जीवन में हमेशा आनंद और उर्जा का संचार बना रहता है l 2017 मे की गयी ऐसी ही शानदार लेह-लद्दाख़ यात्रा के बाद 2018 मे भी हमे ऐसी ही यात्रा करने का मन हुआ परन्तु किसी ना किसी कारण की वजह से हमारी ये बाइक यात्रा संभव नहीं हो पा रही थी l अब होता ये है कि अगर हम कुछ करना चाहें और किसी कारणवश कर ना पायें तो हमारी अधीरता बढती जाती है और उस चीज़ को करने की हमारी इच्छा बहुत तीव्र होती जाती है l आखिरकार 2018 आया और चला गया परन्तु हमे पूरे साल बाइक यात्रा पर जाने का अवसर नही मिल पाया और हमारी अधीरता भी चरम पर पहुँच गयी l

2019 के शुरुआत मे ही हमने ये निर्णय लिया की कुछ भी हो जाए इए साल तो हमे एक बाइक यात्रा करनी ही है l अगला प्रश्न ये उठा की हम किस जगह की यात्रा करेंगे l काफी सोच विचार के बाद हमने दो सर्किट बनाये –

  • केदारनाथ : जयपुर – ऋषिकेश – देवप्रयाग – केदारनाथ – कर्णप्रयाग – रानीखेत – नैनीताल – जयपुर
  • स्पिति वैली : जयपुर – चंडीगढ़ – शिमला – चिटकुल – ताबो – काज़ा – चंद्रताल – मनाली – जयपुर      

हर बाइकर का सपना होता है कि वो भारत मे दो जगहों की यात्रा जरुर करे, पहला लेह-लद्दाख़ और दूसरा स्पिति वैली l लेह-लद्दाख़ तो हम 2017 मे ही कर चुके थे इसीलिए हमने सोचा इस बार स्पिति वैली ही चला जाए, केदारनाथ फिर कभी कर लेंगे l

हिमाचल प्रदेश का उत्तर-पूर्वी भाग जो की भारत और तिब्बत के मध्य पड़ता है, इसे स्पिति वैली कहा जाता है तथा ये "लाहौल और स्पिति" जिले का ही एक भाग है l हिमालय रेंज मे स्तिथ स्पिति वैली बेहद खुबसूरत है और यहाँ तक पहुँचने का रास्ता भी अपने आप मे दर्शनीय है l स्पिति पहुँचने के दो रास्ते है -

पहला - मनाली से काज़ा वाया कुंजुम पास l ये रास्ता लगभग 202 किलोमीटर है और इस रास्ते में दो पास पड़ते है - रोहतांग पास (Alt. 13,050 फीट) और कुंजुम पास (Alt. 15,060 फीट) l बर्फ़बारी के चलते, ये रास्ता साल में लगभग 3-4 महीने ही खुला रहता है l इस रास्ते में ऊँचाई तेज़ी से बढती है जिससे AMS (Acute Mountain Sickness) का खतरा बना रहता है l

दूसरा - शिमला से काज़ा वाया ताबो l ये रास्ता लगभग 410 किलोमीटर लम्बा है और पूरे साल ही खुला रहता है l इस रास्ते मे ऊँचाई धीरे धीरे बढती है इसीलिए इस लिहाज़ से ये रास्ता काफी सुरक्षित रहता है l ये रास्ता बेहद खुबसूरत है और आपको लगभग हर तरह के नज़ारे इस रास्ते में देखने को मिलते है l

हमने ये योजना बनायी की हम जाएँगे शिमला वाले रास्ते से और आएँगे मनाली से होते हुए जिससे हम पूरा सर्किट कर सकें l सामान्य रूप से काज़ा से मनाली वाला रास्ता मई अंत तक खुल जाता है इसीलिए हम ये यात्रा जून में पूर्ण करना चाहते थे l अब चूँकि काज़ा से मनाली वाया कुंजुम पास साल के 3-4 महीने ही खुला रहता है इसीलिए विक्रांत और मैं लगातार नज़र बनाये हुए थे की आखिर किस समय तक काज़ा से मनाली का रास्ता खुलेगा क्योंकि हम पूरा सर्किट करना चाहते थे l हम किसी भी तरह से काज़ा से मनाली का रोमांच खोना नहीं चाहते थे l इस साल जबरदस्त बर्फ़बारी के चलते लग रहा था की इस रास्ते को खुलने मे समय लग सकता है l  

ऑफिस में विक्रांत और मेरी स्पिति यात्रा की वार्तालाप अकसर हमारे एक सहकर्मी और मित्र अश्वनी शर्मा भी बड़े गौर से सुना करते थे तो हमने उन्हें भी इस यात्रा पर चलने के लिए प्रेरित किया l अश्वनी ने स्पिति के ऊपर जब कुछ रिसर्च किया और वहाँ के फोटोज और विडियो देखे तो उनका भी मन इस यात्रा पर जाने के लिए मचल गया l अश्वनी ने अपने दो परम मित्रों रजत भार्गव और राजेश जैन को भी इसमें सम्मिलित कर लिया l आखिरकार रजत, राजेश और अश्वनी ने भी इस यात्रा पर जाने का मन पूर्ण रूप से बना लिया परन्तु तीनों को चूँकि बाइक चलाये हुए एक अरसा हो चूका था तो उन्होंने इस यात्रा को कार से करने की योजना बनायी l ऐसे में विक्रांत ने उन्हें सुझाव दिया की किसी अच्छे टूर ऑपरेटर से पैकेज लिया जा सकता है l रजत, राजेश और अश्वनी के इस यात्रा में सम्मिलित होने पर ये यात्रा यक़ीनन रूप से बहुत ही शानदार होने वाली थी क्योंकि जब भी हम सब मिलते थे किस्सों, कहानियोँ और जबरदस्त मज़ाक का दौर चल पड़ता था l रजत विशेष रूप से काफी खुशमिजाज़ व्यक्ति है और वो हँसने हँसाने का एक भी मौका नहीं छोड़ता l

जब भी किसी ऐसी यात्रा पर जाओ तो सबसे बड़ी चुनौती होती है अपने परिवार को विश्वाश में लेने की l क्यों जा रहे हो? ये कहाँ है ? ऐसी ऐसी जगह ही क्यों मिलती है तुम्हे घुमने की ? बार बार पहाड़ों में क्या करने जाते हो ? बाइक पर घुमने का जोखिम क्यों उठाते हो ? हमे कब घुमा कर लाओगे ? हम सबने लगभग इस तरह के प्रश्नों का सामना किया और अपनी अपनी तरह से इस यात्रा पर जाने का किसी तरह जुगाड़ बिठाया l 

हम सब एक साथ ही ये यात्रा करना चाहते थे, विक्रांत ,मैं और सत्या बाइक से और रजत, राजेश और अश्वनी कार से परन्तु सबसे बड़ी समस्या यात्रा के समय को लेकर थी l हम सोच रहे थे कि हमारी यात्रा शुरू होने तक काज़ा से मनाली का रास्ता भी खुल जाए तब ही इस यात्रा का सम्पूर्ण आनंद प्राप्त हो l हम सब इस यात्रा को जून के दुसरे सप्ताह तक कर लेना चाहते थे क्योंकि उसके बाद कुछ निजी कारणों के चलते हम शायद ही इस यात्रा पर जा पाते l सत्या का प्रोजेक्ट मई के अंत मे रिलीज़ हो रहा था इसीलिए वो इस बाइक यात्रा पर चलने को लेकर पूरा आश्वस्त नहीं था l

अश्वनी ने कुछ दिनों तक कुछ टूर ऑपरेटर्स से मेलबाज़ी और फ़ोनबाज़ी की और आखिरकार रिसर्च और मोल भाव के बाद मई माह के मध्य मे एक पैकेज फाइनल किया गया l इस पैकेज के अनुसार - रजत, राजेश और अश्वनी को चंडीगढ़ से टैक्सी मिल जाएगी और पूरा स्पिति घुमा कर उन्हें चंडीगढ़ ही छोड़ देगी l  पैकेज मे उनका रुकना और खाना-पीना शामिल था l पैकेज के अनुसार, 1 जून को इनोवा टैक्सी उन्हें चंडीगढ़ से लेगी और उस दिन वो नारकंडा रुकेंगे l 2 जून को कल्पा, 3 जून को ताबो , 4 जून और 5 जून को काज़ा, 6 जून को चिटकुल, 7 जून को नारकंडा और 8 जून को वापिस चंडीगढ़ l 

उनकी इस यात्रा कार्यक्रम मे आना और जाना दोनों वाया शिमला ही था क्योंकि टूर ऑपरेटर इस बात को लेकर पूर्ण आश्वस्त था कि काज़ा से मनाली का रास्ता जून के तीसरे सप्ताह तक नहीं खुलेगा l विक्रांत और मैं अभी भी इसी उधेरबुन में थे की क्या हमे हमारी यात्रा को एक सप्ताह और टालना चाहिए जिससे काज़ा से मनाली का रास्ता खुल पाए ? इसी अनिश्चितता के कारण विक्रांत और मैंने कुछ भी पहले से बुक नहीं करवाया l

हम सबने इस यात्रा की तैयारियाँ चालू कर दी l रजत, राजेश और अश्वनी पहली बार इस भूभाग में जा रहे थे सो वो बहुत उत्साहित थे और वे इस यात्रा के लिए खरीदारी करने में लग गए जैसे कपडे, जूते, बैग, इलेक्ट्रोनिक उपकरण, खाने पीने का सामान इत्यादि l चूँकि इन सब को इनोवा में घूमना था इसीलिए इन्होने सामान में ज्यादा कटौती नहीं की l अश्वनी ने 70 लीटर के बैग में आधा तो खाने पीने का सामान भरा हुआ था जिसमे की उसने चाय, टोस्ट से लेकर कई तरह के बिस्कुट्स, ड्राई-फ्रूट्स और नमकीन भर रखी थी l रजत एक बहुत ही बेहतरीन फोटोग्राफर भी है सो उसने अपने फोटोग्राफी से संबंधित सामान भी ख़रीदा और जमाया l

मई के तीसरे सप्ताह तक आते आते अब हमे विश्वास हो गया था की काज़ा से मनाली का रास्ता जून के तीसरे सप्ताह से पहले नहीं खुलेगा l ये हमारे लिए बड़े दुःख की बात थी क्योंकि इतनी दूर जा कर भी हम पूरा सर्किट नहीं कर पा रहे थे l सत्या ने भी इस बात की पुष्टि कर दी थी की वो इस यात्रा पर नहीं जा पाएगा l खैर, मैंने और विक्रांत ने अब ये मन बना लिया था की हम सब मित्र साथ ही ये यात्रा करेंगे l रजत, राजेश, अश्वनी कार में होंगे और मैं, विक्रांत बाइक पर l पैकेज के अनुसार, जहाँ जहाँ ये रुकेंगे वहाँ वहाँ मैं और विक्रांत भी रुक जाएंगे, इस तरह से हम सब मित्र साथ ही ये यात्रा कर सकते हैं l

स्पिति यात्रा के मुसाफिर


मैंने और विक्रांत ने अपनी बाइक की सर्विस करवा ली l मेरी बाइक मे कुछ हैंडलिंग की समस्या थी चूँकि कोन-सेट ख़राब हो चूका था इसीलिए सर्विस के दौरान मैंने कोन-सेट बदलवाया l मुझे बैटरी और टायरों पर भी शक था, बैटरी ख़राब निकली और मैंने बैटरी भी बदलवा ली l टायरों को MRF वाले को दिखवाया तो उसने बोला की ये टायर अभी आराम से 8-9 हज़ार किलोमीटर चल जाएंगे तो मैं निश्चिन्त हो गया l विक्रांत ने भी अपनी बाइक में चैन-चक्का बदलवाया बाकी उसकी बाइक में बैटरी और टायर सही हालत में थे l विक्रांत और मुझे बाकी कोई भी सामान खरीदना नहीं पड़ा क्योंकि हमारी लेह-लद्दाख़  यात्रा से पहले ही हम सब सामान खरीद चुके थे जैसे – सैडल बैग, राइडिंग जैकेट, ग्लव्स, रेनकोट ,बेंजी कार्ड्स इत्यादि l

रजत, राजेश और अश्वनी ने 31 मई की जयपुर से चंडीगढ़ की रात की ट्रेन मे टिकेट बुक करवा लिया था l चूँकि विक्रांत और मुझे उनके साथ साथ ही यात्रा करनी थी इसीलिए हमने ये निर्णय लिया की हम 31 मई को सुबह ही जयपुर से चंडीगढ़ के लिए निकल जाएँगे l विक्रांत और मैंने 31 मई का जीरकपुर में होटल बुक करवा लिया क्योंकि चंडीगढ़-शिमला हाईवे जीरकपुर से ही होकर निकलता है l 

30 मई को मैं और विक्रांत ऑफिस से जल्दी निकले क्योंकि मेरा और विक्रांत का सामान पूरी तरह से नहीं जमा था l रात को सामान जमाते जमाते बारह बज गए l मुझे और विक्रांत को सुबह 6 बजे मोती डूंगरी गणेश मंदिर मिलना था और वहीँ से हमारी यात्रा की शुरुआत करनी थी l हम दोनों ने सोचा था की जितनी जल्दी जयपुर से निकल सकें उतना अच्छा होगा क्योंकि दिन में गर्मी जबरदस्त पड़ने वाली थी l हमारा होटल जीरकपुर में था जो की जयपुर से लगभग 530 किलोमीटर था l हालांकि गर्मी बहुत परेशान करने वाली थी परन्तु स्पिति यात्रा के उत्साह ने उसे लगभग उपेक्षित कर दिया था l मोबाइल मे सुबह 4.30 का अलार्म लगाया और यात्रा के बारे में विचार करते करते कब नींद आ गयी, पता ही नहीं चला  l 

स्पिति वैली यात्रा का सम्पूर्ण वृतांत
स्पिति वैली यात्रा - प्रस्तावना
स्पिति वैली यात्रा - जयपुर से चंडीगढ़
स्पिति वैली यात्रा - चंडीगढ़ से नारकंडा
स्पिति वैली यात्रा - नारकंडा से कल्पा
स्पिति वैली यात्रा - कल्पा से ताबो
........... to be continued


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