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Where did we come from ? | हम कहाँ से आये है ?

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Where did we come from, Who created humans


यूँ तो इस पृथ्वी पर लाखों तरह के जीव रहते है परन्तु इसमें कोई संदेह नहीं है कि इन सब मे सबसे बुद्धिमान जीव इंसान ही है l इंसान ने अपने दिमाग के बल पर बहुत जबरदस्त प्रगति कर ली है पर एक सवाल जो हमेशा से ही हमारे जेहन मे आता है वो है कि हम इंसान कौन है और हमे किसने बनाया ? इसका सबसे सरल और सर्वमान्य उत्तर है की आज जो भी कुछ हम देख रहे है यह सब भगवान् ने बनाया है l इस पर कुछ और प्रश्न दिमाग मे आते है की भगवान् कौन है, भगवान् को किसने बनाया और सबसे बड़ी बात ये की भगवान् के ऐसा क्या मन मे आया की उसने ये सब बनाया? 

हर निर्माण के पीछे कुछ ना कुछ कारण होता है और ये बात तो निश्चित है की निर्माण किया ही इसीलिए जाता है की किसी जटिल चीज़ को सरल किया जाए l आखिर ऐसा क्या था जिसको भगवान् सरल करना चाह रहे थे ? आध्यात्म के अनुसार भगवान् सर्वदा से अस्तित्व मे थे, है और रहेंगे, वो समय और अन्तरिक्ष के परे है और उन्होंने ने ही ये सब बनाया l आध्यात्म एक पक्ष है परन्तु इंसान का स्वभाव है की वो हर चीज़ के पीछे कारण ढूंढ़ता है इसीलिए आज इंसान वैज्ञानिक सबूतों के आधार पर भी अपने अस्तित्त्व के बारे मे खोज कर रहा है l  “हम कहाँ से आये है”, ये एक ऐसा सवाल है जिसका सटीक और पुख्ता जवाब अभी भी किसी के पास नहीं है l

कहते है की इस अद्भुत और सम्पूर्ण ब्रह्माण्ड का निर्माण एक बिंदु से हुआ है l यानी कि जो भी कुछ हम देख रहे है जैसे के हमारा घर पृथ्वी और समस्त गृह, तारे, आकाश-गंगा इत्यादि इत्यादि, बिग-बैंग थ्योरी के अनुसार सब एक बिंदु से बने है l इतना बड़ा और असीमित ब्रह्माण्ड, जो की अभी भी लगातार फ़ैल ही रहा है, सब एक बिंदु मे समाया हुआ था l हालाँकि ये बस थ्योरी ही है और माना जाता है की ऐसा हुआ होगा परन्तु फिर भी इस पर यकीन करना मुश्किल सा प्रतीत होता है l अब सवाल ये है कि अगर सब कुछ ही बिग-बैंग के बाद बना है तो बिग-बैंग होने के एक क्षण पहले ऐसी कौनसी चीज़ थी जिसमे ये बिंदु स्तिथ था या सरल शब्दों मे कहा जाए तो बिग-बैंग से पहले क्या था ?

खैर, बिग-बैंग होने के बाद ब्रह्माण्ड का विस्तार होता गया और ये फैलता गया l ब्रह्माण्ड के लगातार फैलने की वजह से ये ठंडा होता चला गया l धीरे धीरे बिग-बैंग से निकली ऊर्जा और विभिन्न कण आपस मे जुड़ गए और इस तरह विभिन्न तारों का निर्माण हुआ l हमारा सूर्य भी एक तारा ही है और इसका निर्माण भी इसी तरह हुआ है l सूर्य के गुरुत्वाकर्षण की वजह से आस पास मौजूद गैस, कण और चट्टाने आपस मे जुड़ने लगे और धीरे धीरे एक एक गोले मे बदलने लगे, इसी तरह हमारे सोर-मंडल का निर्माण हुआ l

हमारा घर पृथ्वी भी शुरू मे आग का गोला ही थी और इसका तापमान भी बहुत ज्यादा था l धीरे धीरे पृथ्वी पर मौजूद भारी पदार्थ और तत्व इसके केंद्र मे जमा होने लगे l समय बीतने के साथ ही पृथ्वी ठंडी होने लगी परन्तु इस वक़्त भी पृथ्वी के ऊपर धूमकेतु और उल्काओं के आक्रमण चलते रहे l धीरे धीरे उल्काओं का पृथ्वी के ऊपर गिरना कम होता चला गया, पृथ्वी ठंडी होने लगी और इसकी सतह ठोस होने लगी l पृथ्वी पर पानी का आगमन उल्काओं मे स्तिथ बर्फ के क्रिस्टल्स के द्वारा ही संभव हुआ l पृथ्वी पर स्तिथ ज्वालामुखियों से निकलने वाली विभिन्न गैस के कारण धीरे धीरे हमारे वायुमंडल का निर्माण हुआ l सालों साल चली बारिश के कारण हमारे महासागर बने और फिर पृथ्वी पर जीवन पनपा l महासागर से जन्मा शुरूआती जीवन धीरे धीरे कई तरह के जीवों मे बदल गया l डार्विन की थ्योरी के अनुसार पृथ्वी पर मौजूद हर सजीव चीज़ का आधार एक ही है और सभी वहीँ से विकसित हुए है l लाखों सालों के क्रमिक विकास के बाद हम इंसान बने l 

यह पूरी प्रक्रिया बहुत से हिस्सों के जुड़ कर बनी है, कुछ हिस्से केवल थ्योरी ही है, कुछ के वैज्ञानिक प्रमाण है और कुछ के बारे मे हम पूरी तरह अनभिज्ञ है l अरबों साल तक चली इस प्रक्रिया को जानने के बाद ऐसा लगता है जैसे की हम कोई फिल्म देख रहे हो l एक बिंदु से समस्त ब्रह्माण्ड बनना और फिर महासागर मे जन्मे एक कोशिकीय जीव से आधुनिक मानव का निर्माण होना, क्या वास्तव मे ऐसा ही हुआ होगा ? यूँ तो विकासवाद की कई थ्योरी है पर हर थ्योरी मे कुछ ना कुछ खामियाँ है जैसे कि सबसे प्रचिलित डार्विन की थ्योरी इस प्रश्न का जवाब नहीं दे पाती कि अगर मानव का विकास बंदरों से हुआ है तो बंदर आज भी बंदर क्यों है और वो विकसित क्यों नहीं हो पाए ?

आज पृथ्वी पर हर विकसित देश ब्रह्माण्ड मे जीवन और एलियन (परग्रही प्राणी) को तलाश रहा है पर क्या पता इंसान खुद ही एलियन हो l कहने का मतलब है की क्या पता हम इंसानो को भी किसी दूसरी परग्रही सभ्यता से पृथ्वी पर लाया और बसाया गया हो l ऐसा भी हो सकता है कि किसी परग्रही विकसित सभ्यता ने हमारी पृथ्वी पर कुछ ऐसा किया हो की यहाँ जीवन की शुरुआत हुई हो l इसी संधर्भ मे डॉ एलिस सिल्वर ने एक किताब लिखी है “Humans are not from Earth” जिसमे उन्होंने लिखा है की हम इंसान पृथ्वी के मूल निवासी नहीं है और हमे किसी दुसरे ग्रह से यहाँ ला कर बसाया गया है l अपनी थ्योरी को साबित करने के लिए उन्होंने बहुत सारे तर्क भी दिए है जिन्हें पढ़ कर हमारा दिमाग भी कहीं ना कहीं सोचने को मजबूर और भ्रमित हो जाता है l 

कितने आश्चर्य की बात है की आज इंसान ने इतनी तरक्की कर ली है की उसके लिए कुछ भी असंभव नहीं लगता l इतने शक्तिशाली कंप्यूटर जो खरबों गणनाए चंद सेकंड्स मे कर ले, रॉकेट जो की हमे अन्तरिक्ष मे कहीं भी ले जाए, ऊँची ऊँची आसमान को छूती हुई इमारतें, मानव रहित विमान और कार, बड़े बड़े डैम, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से सुसज्जित रोबोट जैसे सोफिया और भी जाने क्या क्या इंसानों ने बना लिया है पर अभी भी हम हमारे अस्तित्व के बारे मे अनजान है l जिस सोफिया को गढ़ कर आज इंसान इतना खुश हो रहा है, क्या पता किसी परग्रही सभ्यता के लिए हम सभी इंसान उनकी सोफिया हो l मानिए या ना मानिए पर सम्पूर्ण मानव जाति के लिए आज भी ये सबसे बड़ा प्रश्न है की हम कहाँ से आये है l 

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