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Bike Trip To Leh Ladakh | लेह लद्दाख़ यात्रा - 20 सितम्बर - सोनमर्ग से जम्मू

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लेह लद्दाख़ यात्रा 2017 - 20 सितम्बर - सोनमर्ग से जम्मू

सुबह उठे और ज्यों ही बाहर देखा दिल खुश हो गया l रात को हम अँधेरा होने के बाद सोनमर्ग पहुँचे थे इसीलिए हम कुछ भी नही देख पाए थे l हमारे होटल के सामने और चारों और हरियाली से आच्छादित पहाड़ थे l इन पहाड़ों पर इतने पेड़ थे कि लद्दाख़ के विपरीत पहाड़ों का मूल स्वरुप ही नही दिख रहा था l जितना की कल हम चले थे आज भी लगभग हमे उतना ही चलना था यानी लगभग 350 किलोमीटर l जैसा की हमने पहले ही योजना बना ली थी, हमे श्रीनगर से डल झील देखते हुए जम्मू निकलना था l रास्ते आज भी पहाड़ी ही थे और हमे आज NH44 का उपयोग करना था l NH44 भारत का सबसे लम्बा राजमार्ग है जो की श्रीनगर से कन्याकुमारी तक जाता है l हमे पता लगा की इस राजमार्ग काफी जगह काम चल रहा है और इस पर यातायात का दबाव भी बहुत रहता है इसीलिए हमने सोचा की हम जल्दी से जल्दी सोनमर्ग से निकल जाएँगे l

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नहा-धो कर सुबह बाइक पर सामान बाँधा और नाश्ता करने पहुँचे l होटल का मालिक काफी सहयोगी और खुशमिजाज़ था l हमने उनसे भी पूछा की क्या हम श्रीनगर से डल झील देखते हुए जा सकते है ? उन्होंने हमे बताया की ज्यादा समस्या नही है बस हमे दो-तीन बातों का ख़याल रखना है l पहला किसी अनजान से ज्यादा बात नही करनी है, दूसरा श्रीनगर पहुँच कर सामान्य पर्यटक की तरह ही व्यवहार रखना है और तीसरा भावनाओं मे बह कर ज्यादा देशभक्ति नही दिखानी है l ये सब सुन कर हमे बहुत अजीब लगा कि कितने दुर्भाग्य की बात है कि हमे हमारे देश मे घुमने के लिए ही सोचना पड़ रहा है l एक वक्त पर कश्मीर धरती पर स्वर्ग नाम से मशहूर था पर अब लोग यहाँ घुमने से कतराने लगे है और ये बात कश्मीरियों के लिए भी अच्छी नही है क्योंकि पर्यटन उद्योग वहाँ के लोगों के लिए कमाई का बड़ा जरिया था l
     
खैर, नाश्ता करके लगभग साढ़े आठ बजे हम जम्मू के लिए निकल पड़े l रास्ते मे पड़ने वाले दृश्य देख लगा की सोनमर्ग को भगवान् ने बहुत खूबसूरती प्रदान की है, वही साफ़ बहती हुई नदी, नीला आकाश और हरियाली से आच्छादित पहाड़ l लद्दाख़ के बाद यहाँ का भूभाग बिलकुल बदल चूका था और अब चारों और हरियाली ही हरियाली दिखाई दे रही थी l इन नजारों का आनंद लेते हुए जल्द ही हम उस जगह पहुँच गए जहाँ से एक रास्ता श्रीनगर शहर की तरफ अन्दर जा रहा था और दूसरा रास्ता श्रीनगर बायपास से होता हुआ जम्मू की तरफ l सब कुछ सामान्य लग रहा था और हम श्रीनगर शहर की तरफ वाले रास्ते पर मुड़ गए l वो सड़क काफी सकड़ी थी, कुछ देर चलने और वहाँ का माहौल देखने के बाद विक्रांत को ये रास्ता कुछ अजीब और असामान्य सा लग रहा था l वहाँ पर रूककर हमने दुबारा सोचा की क्या हमे श्रीनगर जाना चाहिए l मुझे लग रहा था कि ये रास्ता ज्यादा दूर तक नही होगा और जल्द ही हम डल झील पहुँच जाएँगे l सत्या हमेशा की तरह तटस्थ था और उसने ये निर्णय मेरे और विक्रांत के ऊपर छोड़ दिया l आखिर हमने निर्णय लिया की कुछ दूर और चलते है और अगर कुछ असामान्य लगा तो लौट जाएँगे l

कुछ दूर चलने के बाद हमे एक पुलिस चौकी दिखी l बाहर दो पुलिस वाले हथियार सहित खड़े थे और एक पुलिस ऑफिसर से बात कर रहे थे l विक्रांत ने अपनी बाइक उस पुलिस ऑफिसर के पास रोक दी और उनसे डल झील जाने का रास्ता पूछा l इस पर उस पुलिस ऑफिसर ने दुसरे पुलिस वाले से पूछा की आज शहर मे किसी तरह की कोई समस्या तो नही है ? दुसरे पुलिस वाले ने जवाब दिया कि कल से थोड़ी शान्ति है l ये सुन कर हमारी हँसी छूट गयी और साथ मे चिंता का भाव भी चेहरे पर तैर गए पर वो पुलिस ऑफिसर हमारी चिंता भाँप गया l उसने ना केवल हमे डल झील का रास्ता बताया वरन अपना फ़ोन नंबर भी दिया और हमे आश्वस्त किया की कैसी भी मुसीबत आ जाए, मुझे फ़ोन कर देना l मुसीबत के समय फ़ोन तो हम क्या कर पाते क्योंकि हमारा किसी का भी फ़ोन काम ही नही कर रहा था और कोई अपरिचित हमे फ़ोन देता नही l संयोग से अगर कोई बड़ी घटना हो भी जाती तो शायद ही हमे फ़ोन करने का मौका मिलता फिर भी इस फ़ोन नंबर ने हमे बहुत ताकत दी और हम डल झील की ओर बढ़ गए l

शहर पहुँचते ही हर जगह हथियारों से लेस सेना के जवान दिखने लग गए l हर सौ-डेढ़ सौ मीटर पर कोई ना कोई सेना का जवान या गश्त करता हुआ सेना का वाहन दिख ही जाता था l कुछ देर बाद लगभग सुबह के ग्यारह बजे हम डल झील पहुँच गए l पहले झील का एक चक्कर लगाया और फिर डल झील के सामने स्तिथ एक रेस्टोरेंट बैठ गए l नाश्ता तो हम करके ही चले थे इसीलिए एक एक लस्सी का आर्डर दिया l डल झील आकर अब हमे यहाँ का वातावरण थोडा सामान्य लगने लगा था l हालाँकि पर्यटक बहुत ज्यादा नही थे फिर भी वहाँ काफी चहल-पहल थी l कुछ लोग शिकारा मे घुमने मे व्यस्त थे, कुछ फूल बेच रहे थे, कुछ फ़ोटोज़ लेने मे मस्त थे, कुछ कश्मीर मे बना हुआ सामान बेच रहे थे, कुछ हाउसबोट मे बैठे थे l हमने लस्सी पी और फिर कुछ फ़ोटोज़ लिए l हमे जम्मू पहुँचना था, हमारे पास ज्यादा समय नही था, नही तो हम भी शिकारा का मज़ा लेते l

एक घंटा डल झील पर बिताने के बाद हम जम्मू के लिए रवाना हो गए l कुछ ही देर बाद हम NH44 पर थे और यातायात एकदम से बढ़ गया l बहुत दिनों बाद इतना यातायात देखा था, सेना के वाहन भी बहुतायत मे थे l हर थोड़ी देर मे हमे सेना का एक बड़ा हथियारों से लेह वाहन दिखाई दे जाता था l हमे पता था कि जवाहर टनल तक ऐसी ही स्तिथि रहेगी l हम जवाहर टनल की ओर बढ़ रहे थे तभी हमारे पीछे से सेना की दो जिप्सी तेज़ी से निकली l इस जिप्सी से तेज़ी से सेना के जवान निकले और यहाँ वहाँ फ़ैल गए l लगा जैसे आँखों के आगे किसी दक्षिण भारत की फिल्म का दृश्य चल रहा है l पता नही क्या बात थी पर एक मिनट के लिए हमारी हवा निकल गयी थी l
 
कुछ देर बाद हमने जवाहर टनल पार कर ली तब जा कर हमारी साँस मे साँस आयी l जवाहर टनल पार करने के बाद यातायात की वजह से हमारी हालत और खराब हो गयी l पहाड़ी रास्ते थे, जगह जगह जाम था, सड़के टूटी हुई थी, हर जगह काम चल रहा था और धुल ही धुल उड़ रही थी l कई जगह तो इतना जाम था कि हमारे पास बाइक होने के बावजूद हम वहाँ से निकल नही पा रहे थे l बहुत अधिक यातायात होने की वजह से कई बार हम तीनों भी एक दुसरे से बिछुड़ गए थे l रामबन के पास मुझे एक जगह सत्या खड़ा हुआ मिला l विक्रांत आगे निकल गया था या पीछे था, हमे समझ नही आ रहा था l सत्या के हिसाब से विक्रांत अभी पीछे ही था तो हमने वहाँ उसका इंतज़ार करना उचित समझा l

वहाँ दो-तीन दुकाने थी जिस पर सलाद का सामान मिल रहा था जैसे खीरा, टमाटर, केले इत्यादि l कुछ ही देर मे विक्रांत भी आ गया, खाने की ज्यादा इच्छा नही थी फिर भी हमने वहाँ ब्रेक ले लिया और खीरे, केले  इत्यादि खाए l हमारे पास पीने का पानी भी नही था और उस दुकान के आस पास पानी की बोतल भी नही मिल रही थी l जब हमने दुकान वाले से पीने का पानी माँगा तो वो हँसने लगा और उसने हमे उसकी दुकान के ऊपर पाइप से बहते हुए पानी की ओर इशारा किया l उसने बोला भाई साहब ये पानी सीधे पहाड़ से ही आ रहा है और ऐसे ही बहता रहता है आप आराम से इस पानी को पी सकते है l फिर हमने उस बहते हुए पानी से अपना मुँह धोया और प्यास बुझाई l पानी पीते पीते दिमाग मे ख़याल आया कि इन लोगों का जीवन कितना सीधा-साधा और सरल है l बड़े शहरों मे बसने वाले ज्यादा पढ़े लिखे लोग अपना जीवन अनायास ही कितना जटिल बना लेते है l

पानी पी कर हम जम्मू की तरफ रवाना हो गए l यातायात का वही हाल था, जगह जगह जाम और इतनी धुल उड़ रही थी की कुछ ही देर मे हमारी जैकेट जो की काले रंग की थी वो मिट्टी जमने की वहज से भूरे रंग की हो गयी थी l इस पूरी यात्रा मे हम इतना परेशान किसी दिन भी नही हुए थे l चलते चलते शाम के करीब साढ़े चार बज गए, चाय पीने की इच्छा हुई तो एक ढाबा देख कर हम रुक गए l चाय का आर्डर दिया और जैकेट उतार कर फटकारी, मुँह धोया l अचानक ही ढ़ाबे के पीछे की तरफ ध्यान गया तो देखा की दूर एक डेम बना हुआ है l ये डेम था बग्लिहर डेम l ढ़ाबे वाले ने मौके का फायदा उठा कर पीछे के तरफ एक बड़ी बालकनी बना दी थी जिससे लोग वहाँ बैठ कर डेम को देखते हुए चाय पी सकें l हम भी वहाँ लगभग आधा-पौना घंटा बैठे रहे l ढ़ाबे वाले से बात की और जम्मू के बार मे पूछा तो उसने बताया की यहाँ से जम्मू लगभग 110 किलोमीटर है l शाम के लगभग साढ़े पाँच बज गए थे और इस यातायात को देखकर लग नही रहा था की हम समय से जम्मू पहुँच पाएँगे l

चाय पी कर हम दुबारा जम्मू की ओर रवाना हो गए l कुछ आगे पहुँचे तो एक टनल दिखाई दी जो काफी नयी सी लग रही थी l एक मिनट के लिए रुके और टनल का नाम पढ़ा, ये थी चेनानी-नश्री टनल l हमने सोचा होगी कोई छोटी-मोटी टनल और उसमे दाखिल हो गए l अन्दर से टनल काफी नयी लग रही थी, चारों ओर छोटी छोटी लाईटो से जगमग थी और उसमे सुरक्षा के काफी जबरदस्त इंतजाम थे l कुछ देर तक हम इसमें चलते रहे पर हमे इसका दूसरी तरफ का अंत दिखाई ही नही दे रहा था और हमारी जिज्ञासा बढती जा रही थी l इससे पहले हम ओट टनल से होकर आये थे जो की लगभग 3 किलोमीटर लंबी थी पर ये टनल तो ख़त्म होने का नाम ही नही ले रही थी l काफी देर इसमें चलने के बाद आखिरकार हम इससे बाहर निकले तो हमारी ख़ुशी दुगनी हो गयी l इस टनल से निकलते ही जम्मू की दुरी लगभग 30 किलोमीटर कम हो गयी l पता लगा की ये भारत की सबसे लंबी टनल है जिसकी लम्बाई लगभग 9.3 किलोमीटर है l हालाँकि टनल से निकल कर उधमपुर तक हमे काफी ख़राब रास्ता और यातायात मिला फिर भी अचानक ही 30 किलोमीटर रास्ता कम होने की ख़ुशी बहुत हुई l

उधमपुर से निकलते ही शानदार फोर लेन हाईवे चालू हो गया l शाम के करीब साढ़े छ बज चुके थे l अच्छी सड़क आते ही हमने हमारी रफ़्तार बढ़ा दी और आखिरी 70 किलोमीटर लगभग एक घंटे मे ही चल कर करीब साढ़े सात बजे जम्मू पहुँच गए l जम्मू पहुँच कर हमने सबसे पहले होटल तलाश किया l एक-दो जगह देखने के बाद हमे एक ठीक-ठाक सा होटल पसंद आ गया l उस वक़्त तक हम इतना थक चुके थे की बहुत ज्यादा जगह घुमने की गुंजाइश नही बची थी l हमारे कपड़ो पर एक एक किलो मिट्टी जमा हो चुकी थी l कमरे मे जा कर नहाये और कपडे बदले तब जा कर चैन आया l

हमारा होटल जम्मू के मुख्य बाज़ार मे ही था सो हम बाज़ार घुमने निकल गए l कुछ देर घुमने के बाद एक अच्छे से रेस्टोरेंट तसल्ली से बैठे l खाना खाते खाते और बात करते करते रात के ग्यारह बज चुके थे l कमरे मे आये और कुछ देर बातें की, उसके बाद हमे पता ही नहीं चला की हमारी कब आँख लग गयी क्योंकि जैसा हम आज थके थे वैसा इस यात्रा पर किसी भी दिन नही थके थे l           

Leh Ladakh Bike Trip, Sonmarg
खुबसूरत सोनमर्ग

Leh Ladakh Bike Trip
सोनमर्ग मे बहती नदी और हरियाले पहाड़

Leh Ladakh Bike Trip, Dal Lake
डल झील

Leh Ladakh Bike Trip
डल झील

Leh Ladakh Bike Trip
डल झील


Leh Ladakh Bike Trip
डल झील

Leh Ladakh Bike Trip
डल झील के साथ चलती सड़क

Leh Ladakh Bike Trip
डल झील के साथ चलती सड़क

Leh Ladakh Bike Trip, Dal Lake
डल झील मे स्तिथ पानी के फव्वारे

Leh Ladakh Bike Trip, Dal Lake
हाउसबोट

Leh Ladakh Bike Trip
हाउसबोट और शिकारे

Leh Ladakh Bike Trip
शिकारे

Leh Ladakh Bike Trip
खेत

Leh Ladakh Bike Trip
बग्लिहर डेम
लेह लद्दाख़ यात्रा का सम्पूर्ण वृतांत
1.   लेह लद्दाख़ यात्रा - प्रस्तावना
2.   लेह लद्दाख़ यात्रा - जयपुर से चंडीगढ़
3.   लेह लद्दाख़ यात्रा - चंडीगढ़ से मनाली
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11. लेह लद्दाख़ यात्रा - लेह शहर
12. लेह लद्दाख़ यात्रा - लेह से सोनमर्ग
13. लेह लद्दाख़ यात्रा - सोनमर्ग से जम्मू
14. लेह लद्दाख़ यात्रा - जम्मू से चंडीगढ़
15. लेह लद्दाख़ यात्रा - चंडीगढ़ से जयपुर
      

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